‘कोर्ट तय करे, हम जिंदा रहें या नहीं’… इस बयान के साथ 700 से ज्यादा छोटे अमेरिकी कारोबारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ अदालती लड़ाई लड़ी और आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक फैसला हासिल कर लिया। कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया, जिससे छोटे व्यवसायों को राहत मिली है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। यह फैसला 6-3 के बहुमत से आया, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
ट्रंप ने 2025 में “Liberation Day” टैरिफ के नाम से इन आयात शुल्कों को लागू किया था, जिसका मकसद विदेशी देशों पर दबाव बनाना और अमेरिकी उद्योगों को मजबूत करना था। लेकिन इन टैरिफ ने छोटे कारोबारियों पर भारी असर डाला। अनुमान के मुताबिक, 2025 में अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर 223 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ा, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 175-200 बिलियन डॉलर के बीच बताया गया।
छोटे कारोबारियों के एक गठबंधन “We Pay The Tariffs” ने इस नीति के खिलाफ आवाज उठाई। इस गठबंधन में 700 से ज्यादा छोटे व्यवसाय शामिल थे, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अमicus brief दाखिल किया। इन व्यवसायों ने दावा किया कि टैरिफ ने उनकी लागत बढ़ा दी, जिससे वे छंटनी करने, कीमतें बढ़ाने या कारोबार बंद करने को मजबूर हुए। कई ने इसे अस्तित्व का संकट बताया।
प्रमुख मुकदमे में न्यूयॉर्क स्थित वाइन इम्पोर्टर V.O.S. Selections के मालिक Victor Schwartz सहित पांच छोटे व्यवसायों ने Liberty Justice Center की मदद से अप्रैल 2025 में केस दायर किया। इस केस का नाम V.O.S. Selections, Inc. v. Trump था। निचली अदालतों में भी ये व्यवसाय जीते और U.S. Court of International Trade ने मई 2025 में टैरिफ पर स्थायी रोक लगा दी।
ट्रंप प्रशासन ने अपील की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि IEEPA का इस्तेमाल आपात स्थिति में प्रतिबंध लगाने के लिए है, न कि व्यापक टैरिफ के लिए। यह फैसला अमेरिकी संविधान के तहत कांग्रेस को ही टैक्स और ड्यूटी लगाने का अधिकार देता है।
ट्रंप ने फैसले पर नाराजगी जताई और इसे निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि वे अब 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत सभी देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे। साथ ही अन्य जांच भी शुरू करेंगे।
छोटे कारोबारियों के लिए राहत की बात है, लेकिन रिफंड की प्रक्रिया जटिल हो सकती है। अनुमान है कि 175 बिलियन डॉलर से ज्यादा के टैरिफ रिफंड के लिए हजारों मुकदमे दायर हो सकते हैं। Court of International Trade में पहले से ही सैकड़ों केस चल रहे हैं। बड़े व्यवसाय जैसे Costco, Revlon, Prada और BYD ने भी रिफंड के लिए केस दायर किए हैं। छोटे व्यवसायों को कानूनी खर्चों के कारण रिफंड छोड़ने पड़ सकते हैं।
We Pay The Tariffs गठबंधन ने तत्काल, पूर्ण और स्वचालित रिफंड की मांग की है। कई व्यवसायों ने कहा कि टैरिफ ने उन्हें छंटनी, ऑपरेशनल बदलाव और निवेश रोकने पर मजबूर किया।
यह फैसला अमेरिकी व्यापार नीति पर बड़ा प्रभाव डालेगा। छोटे कारोबारियों की यह जीत दिखाती है कि कैसे सामान्य उद्यमी राष्ट्रपति की नीतियों को चुनौती देकर बदलाव ला सकते हैं।
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