ये 10 राज्य खिलाते हैं देश को सबसे ज्यादा केले, पहले नंबर पर कौन? इन देशों में खूब है डिमांड

“भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है, जहां 2024-25 में कुल उत्पादन करीब 380 लाख टन पहुंचने का अनुमान है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य मिलकर देश की अधिकांश केला उपज देते हैं, जबकि निर्यात में मध्य पूर्व के देशों जैसे UAE, इराक, ईरान और ओमान में भारतीय केलों की मांग तेजी से बढ़ रही है।”

भारत में केला उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और यह फल न केवल घरेलू बाजार को संतुष्ट करता है बल्कि निर्यात में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। नवीनतम अनुमानों के अनुसार 2024-25 में देश का कुल केला उत्पादन लगभग 380.35 लाख टन होने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी वृद्धि दर्शाता है। यह उत्पादन मुख्य रूप से कुछ प्रमुख राज्यों पर निर्भर है, जहां अनुकूल जलवायु, सिंचाई सुविधाएं और ऊतक संवर्धन जैसी तकनीकों ने उत्पादकता को बढ़ावा दिया है।

टॉप 10 केला उत्पादक राज्य (2024-25 के अनुमानित आंकड़ों के आधार पर)

क्रमांकराज्यअनुमानित उत्पादन (लाख टन में)प्रमुख किस्मेंविशेषता
1तमिलनाडु50-60Nendran, Robusta, Poovanऊतक संवर्धन और वर्ष भर उत्पादन
2महाराष्ट्र50-56Basrai, Safed Velchiउच्च उत्पादकता, ड्रिप सिंचाई
3गुजरात40-45Grand Naine, Robustaजैविक खेती और कोल्ड चेन सुविधा
4आंध्र प्रदेश50+Rasthali, Poovanबड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती
5उत्तर प्रदेश40-47Dwarf Cavendish, Robustaगंगा क्षेत्र में मजबूत उत्पादन
6कर्नाटक20-25Robusta, Poovanदक्षिणी जिलों में प्रमुख फसल
7मध्य प्रदेश18-20Dwarf Cavendishबुंदेलखंड और मालवा क्षेत्र
8बिहार18-20विभिन्न स्थानीय किस्मेंतीन गुना वृद्धि पिछले दशक में
9पश्चिम बंगाल12-15Champa, Mortabanपूर्वी क्षेत्र में बढ़ती उपज
10ओडिशा10-12Robusta, Tissue Cultureनिर्यात संभावनाओं वाली नई पहल

ये राज्य मिलकर भारत के कुल केला उत्पादन का बड़ा हिस्सा योगदान देते हैं। तमिलनाडु और महाराष्ट्र अक्सर शीर्ष पर रहते हैं, जहां उच्च उत्पादकता (प्रति हेक्टेयर 50-65 टन तक) दर्ज की जाती है। गुजरात और आंध्र प्रदेश में जैविक और निर्यात-उन्मुख खेती पर जोर है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तरी राज्य घरेलू मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण हैं।

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केला उत्पादन में वृद्धि के प्रमुख कारणों में ऊतक संवर्धन पौधे, ड्रिप सिंचाई, एकीकृत कीट प्रबंधन और सरकारी योजनाओं का योगदान है। महाराष्ट्र में ड्रिप सिंचाई से 65% से अधिक फार्म प्रभावित हैं, जबकि गुजरात में कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर ने गुणवत्ता बनाए रखने में मदद की है।

निर्यात में बढ़ती मांग: ये देश खरीद रहे हैं भारतीय केले

भारतीय केलों की अंतरराष्ट्रीय मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों में। वित्त वर्ष 2024-25 में केला भारत का सबसे अधिक निर्यात होने वाला फल बन गया है, जिसमें निर्यात मूल्य 377.5 मिलियन डॉलर तक पहुंचा। प्रमुख निर्यात गंतव्य निम्नलिखित हैं:

UAE (संयुक्त अरब अमीरात) : सबसे बड़ा बाजार, जहां भारतीय केले पुडिंग और कुकीज में इस्तेमाल होते हैं।

इराक और ईरान : मजबूत मांग, विशेष रूप से गुणवत्ता वाले Cavendish किस्म के लिए।

ओमान, कुवैत, बहरीन : खाड़ी देशों में बढ़ती खपत।

बांग्लादेश और नेपाल : पड़ोसी देशों में निकटता के कारण नियमित निर्यात।

मलेशिया और श्रीलंका : दक्षिण-पूर्व एशिया में उभरते बाजार।

रूस : नया लक्षित बाजार, जहां निर्यात बढ़ाने की योजना है।

मध्य पूर्व के देशों में भारतीय केलों की मांग इसलिए अधिक है क्योंकि वे ताजगी, स्वाद और कीमत में प्रतिस्पर्धी हैं। निर्यात में 29.7% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है और 2026 में यह और बढ़ने की संभावना है।

उत्पादकता बढ़ाने के प्रमुख तरीके

ऊतक संवर्धन: रोग-मुक्त पौधे उपलब्ध कराना।

ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई: पानी की बचत और बेहतर उपज।

जैविक खेती: गुजरात और महाराष्ट्र में बढ़ती प्रवृत्ति।

निर्यात क्लस्टर: APEDA द्वारा समर्थित कोल्ड स्टोरेज और पैकेजिंग।

ये राज्य न केवल देश को केले से भरपूर रखते हैं बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्रदान करते हैं। निर्यात की बढ़ती मांग से किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है, जिससे केला खेती और आकर्षक हो गई है।

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Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है।

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