आरबीआई के सख्त नियमों से बीएसई, ग्रो और एंजेल वन के शेयर 7-10% तक टूटे, प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग पर लगी रोक

“आरबीआई ने बैंक लेंडिंग नियमों में सख्ती बरतते हुए कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज के लिए 100% कोलेटरल अनिवार्य किया और ब्रोकर्स की प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए बैंक फंडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। इससे बीएसई के शेयर 10% तक, एंजेल वन 9.5% तक और ग्रो (बिलियनब्रेंस गैरेज वेंचर्स) 5% तक गिर गए। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, जिससे डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग वॉल्यूम और लिक्विडिटी पर असर पड़ने की आशंका है।”

आरबीआई के इस फैसले से 7% तक टूटे बीएसई-ग्रो और एंजेल के स्टॉक्स, शेयर और कमोडिटी में प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के नियम होंगे सख्त

16 फरवरी को शेयर बाजार में कैपिटल मार्केट से जुड़े स्टॉक्स में भारी बिकवाली देखी गई। आरबीआई द्वारा 13 फरवरी को जारी संशोधित दिशानिर्देशों के बाद बीएसई लिमिटेड के शेयर 9.9% से 10% तक गिरकर दिन के निचले स्तर ₹2,726.30 पर पहुंच गए। एंजेल वन के शेयर 9.5% तक लुढ़ककर ₹2,441 के स्तर पर आए, जबकि ग्रो (बिलियनब्रेंस गैरेज वेंचर्स लिमिटेड) के शेयर 5% तक नीचे आए और ₹164.50 के निचले स्तर को छुआ।

आरबीआई ने कमर्शियल बैंक्स – क्रेडिट फैसिलिटीज अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026 के तहत कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (सीएमआई) जैसे स्टॉक ब्रोकर्स, क्लियरिंग मेंबर्स और कमोडिटी ब्रोकर्स के लिए बैंक फंडिंग के नियम कड़े किए हैं। मुख्य बदलावों में शामिल हैं:

सभी क्रेडिट फैसिलिटीज को 100% कोलेटरल से बैक किया जाना अनिवार्य।

बैंक गारंटी के लिए कम से कम 50% कोलेटरल जरूरी, जिसमें 25% कैश में होना चाहिए।

प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग (ब्रोकर की अपनी पूंजी से ट्रेडिंग) के लिए बैंक फंडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध।

प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग गारंटी के लिए 100% सिक्योरिटी और कम से कम 50% कैश कोलेटरल अनिवार्य।

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ये नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। आरबीआई का उद्देश्य सट्टेबाजी वाली गतिविधियों को कम करना और वित्तीय प्रणाली में जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना है। प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग पर रोक से ब्रोकर्स अपनी बैलेंस शीट से ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे, जिससे लीवरेज कम होगा और फंडिंग कॉस्ट बढ़ेगी।

प्रभावित कंपनियां और गिरावट का स्तर

कंपनीअधिकतम इंट्राडे गिरावट (%)दिन का निचला स्तर (₹)पिछला क्लोज (लगभग)
बीएसई लिमिटेड9.9 – 10%2,726.303,025.30
एंजेल वन9.5%2,4412,698.30
ग्रो (बिलियनब्रेंस)5%164.50172.92
अन्य (मोतीलाल ओसवाल, जेएम फाइनेंशियल)3-4.5%

जेफरीज जैसी ब्रोकरेज फर्म ने अनुमान लगाया है कि प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग नियमों से बीएसई की कमाई पर 10% तक असर पड़ सकता है। डेरिवेटिव्स में प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग कुल फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस टर्नओवर का करीब 40-50% हिस्सा रखती है। इस प्रतिबंध से ऑप्शंस टर्नओवर में 10-12% की कमी आ सकती है, जिसका सीधा असर एक्सचेंज की रेवेन्यू पर पड़ेगा।

ब्रोकरेज फर्मों के लिए फंडिंग कॉस्ट बढ़ने से मार्जिन ट्रेडिंग और लीवरेज प्रोडक्ट्स प्रभावित होंगे। हालांकि, क्लाइंट फंडिंग और रिटेल ट्रेडिंग पर सीधा असर कम होने की उम्मीद है, लेकिन कुल मार्केट लिक्विडिटी और वॉल्यूम में कमी आ सकती है। कुछ ब्रोकर्स ने लिक्विडिटी रिस्क की चेतावनी दी है और रेगुलेटर्स से प्रतिनिधित्व करने की योजना बनाई है।

यह बदलाव हाल ही में इक्विटी फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर बढ़ाए गए ट्रांजेक्शन टैक्स के साथ मिलकर डेरिवेटिव ट्रेडिंग को और प्रभावित कर सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सट्टेबाजी कम होगी, लेकिन शॉर्ट टर्म में ट्रेडिंग एक्टिविटी और ब्रोकरेज वॉल्यूम पर दबाव बनेगा।

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Disclaimer: यह खबर सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले अपनी जांच-पड़ताल और विशेषज्ञ सलाह लें।

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