भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लगाई है। इस डील से भारत में यूरोपीय सामानों के आयात पर 96.6% से 97% तक टैरिफ खत्म या काफी कम होंगे, जिससे कपड़े, ऑलिव ऑयल, चॉकलेट्स, वाइन, स्पिरिट्स, बीयर, कारें, मशीनरी और कई अन्य प्रोडक्ट्स भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सस्ते हो जाएंगे। भारतीय निर्यातकों को भी फायदा मिलेगा, खासकर टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स-ज्वेलरी और मरीन प्रोडक्ट्स सेक्टर में।
भारत-EU FTA से भारतीय बाजार में क्या सस्ता होगा?
भारत और यूरोपीय संघ के बीच आज घोषित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया है। यह समझौता 18 साल की लंबी बातचीत के बाद आया है और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के बीच दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। इस डील से भारत में यूरोपीय यूनियन के 96.6% मूल्य के सामानों पर टैरिफ खत्म या काफी कम हो जाएंगे, जबकि भारत के 97% से ज्यादा टैरिफ लाइन्स पर यूरोप में प्रेफरेंशियल एक्सेस मिलेगा।
उपभोक्ताओं के लिए प्रमुख लाभ
भारतीय उपभोक्ता इस समझौते से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि यूरोपीय आयातित सामानों की कीमतें घटेंगी। यहां प्रमुख कैटेगरी और अनुमानित टैरिफ कटौती की जानकारी है:
शराब और स्पिरिट्स : वर्तमान में 150% तक के हाई टैरिफ से वाइन और स्पिरिट्स की कीमतें बहुत ज्यादा हैं। अब वाइन पर टैरिफ 20-30% तक कम होगा, जबकि स्पिरिट्स पर भी समान स्तर की कटौती होगी। बीयर पर टैरिफ 50% तक घटेगा। इससे यूरोपीय वाइन, व्हिस्की और बीयर भारतीय बाजार में काफी सस्ती हो जाएंगी।
खाने का तेल और फूड प्रोडक्ट्स : ऑलिव ऑयल, चॉकलेट्स, पास्ता और अन्य प्रीमियम फूड आइटम्स पर टैरिफ में बड़ी कमी आएगी। ऑलिव ऑयल जैसे आयातित तेलों की कीमतें 20-40% तक कम हो सकती हैं, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद होगा।
कपड़े और फैशन : यूरोपीय ब्रांडेड कपड़े, अपैरल और टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम होने से प्रीमियम क्लोदिंग, फुटवियर और एक्सेसरीज सस्ते होंगे। हालांकि ज्यादातर टेक्सटाइल आयात पर टैरिफ रिडक्शन होगा, लेकिन कुछ कैटेगरी में जीरो टैरिफ भी संभव है।
ऑटोमोबाइल और पार्ट्स : कारों पर टैरिफ में फेज्ड कटौती होगी, खासकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर पांचवें साल से। लक्जरी और मिड-रेंज यूरोपीय कारों की कीमतें घटेंगी, जिससे ऑटो सेक्टर में कॉम्पिटिशन बढ़ेगा।
अन्य उपभोक्ता सामान : चॉकलेट्स, कॉस्मेटिक्स, मशीनरी, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और फार्मास्यूटिकल्स पर भी टैरिफ खत्म या कम होंगे। इससे घरेलू उपकरण और इंडस्ट्रियल गुड्स सस्ते होंगे।
टैरिफ कटौती का प्रमुख ओवरव्यू (तालिका)
भारतीय निर्यातकों को फायदा
| कैटेगरी | वर्तमान टैरिफ (अनुमानित) | नया टैरिफ (FTA के बाद) | अपेक्षित प्रभाव |
|---|---|---|---|
| वाइन और स्पिरिट्स | 150% तक | 20-40% | काफी सस्ती यूरोपीय शराब |
| बीयर | उच्च स्तर | 50% तक | लोकप्रिय ब्रांड्स सस्ते |
| ऑलिव ऑयल और फूड आइटम्स | 30-50% | काफी कम या जीरो | प्रीमियम खाद्य तेल सस्ते |
| कपड़े और अपैरल | 10-20% | रिडक्शन/जीरो (कुछ में) | ब्रांडेड क्लोदिंग पर बचत |
| कारें (लक्जरी) | 100%+ | फेज्ड कटौती, 10% तक | यूरोपीय कारें किफायती |
| मशीनरी और इलेक्ट्रिकल | 20-44% | ज्यादातर जीरो | इंडस्ट्री और घरेलू उपयोग में बचत |
यह डील सिर्फ आयात सस्ता करने तक सीमित नहीं है। भारत के निर्यातकों के लिए यूरोप का बाजार खुल जाएगा:
टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर और फुटवियर पर जीरो ड्यूटी से तुरंत लाभ।
मरीन प्रोडक्ट्स (26% तक टैरिफ था), केमिकल्स (12.8%), प्लास्टिक/रबर (6.5%), जेम्स-ज्वेलरी (4%) पर जीरो टैरिफ।
कुल मिलाकर 33 अरब डॉलर से ज्यादा के लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट्स को फायदा, जिससे रोजगार बढ़ेगा।
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
समझौता 2032 तक EU के भारत में एक्सपोर्ट्स को दोगुना करने का लक्ष्य रखता है।
500 मिलियन यूरो का EU सपोर्ट क्लाइमेट चेंज कम करने के लिए।
सर्विसेज, इन्वेस्टमेंट और प्रोक्योरमेंट में भी एक्सेस बढ़ेगा।
ट्रेड वैल्यू के हिसाब से 96.6% EU गुड्स पर टैरिफ रिडक्शन या एलिमिनेशन।
डिस्क्लेमर : यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। वास्तविक कीमतों में बदलाव लागू होने पर निर्भर करेगा।