“हाल ही में एक महत्वपूर्ण अदालती फैसले ने स्पष्ट किया है कि ADAS (Advanced Driver Assistance Systems) फीचर्स वाली कारों में ड्राइवर की जिम्मेदारी कम नहीं होती। L1 और L2 स्तर के ADAS सिस्टम को मानव ड्राइवर का विकल्प नहीं माना जाएगा। दुर्घटना की स्थिति में ड्राइवर पर ही प्राथमिक दायित्व रहेगा, जिससे लापरवाही पर जेल और भारी जुर्माना लग सकता है। यह फैसला भारतीय सड़कों पर बढ़ते ADAS वाले वाहनों के बीच सुरक्षा और कानूनी जागरूकता को मजबूत करने वाला है।”
कोर्ट का फैसला: ADAS फीचर्स ड्राइवर की जिम्मेदारी नहीं हटाते
भारतीय अदालत ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाया है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) फीचर्स वाली कारों में ड्राइवर की प्राथमिक जिम्मेदारी बरकरार रहती है। यह फैसला उन वाहनों पर लागू होता है जिनमें Level 1 या Level 2 ADAS सिस्टम लगे होते हैं, जैसे Adaptive Cruise Control, Lane Keep Assist, Automatic Emergency Braking, Blind Spot Monitoring आदि। कोर्ट ने माना कि ये सिस्टम केवल सहायता प्रदान करते हैं, न कि ड्राइवर को पूरी तरह प्रतिस्थापित करते हैं।
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ड्राइवर को हमेशा वाहन पर पूर्ण नियंत्रण रखना अनिवार्य है। यदि ADAS फीचर चालू होने के बावजूद ड्राइवर लापरवाही बरतता है और दुर्घटना होती है, तो वह सेक्शन 184 (खतरनाक ड्राइविंग) या सेक्शन 304A (लापरवाही से मौत) के तहत दंडनीय होगा। इसमें 6 महीने से 2 साल तक की कैद और जुर्माना दोनों शामिल हो सकते हैं। गंभीर मामलों में मुआवजा और लाइसेंस सस्पेंड भी हो सकता है।
ADAS स्तर और कानूनी स्थिति
| ADAS स्तर | विवरण | ड्राइवर की जिम्मेदारी | कानूनी नोट |
|---|---|---|---|
| Level 0 | कोई ऑटोमेशन नहीं | पूर्ण | सामान्य नियम लागू |
| Level 1 | ड्राइवर असिस्ट (जैसे ACC या Lane Warning) | पूर्ण नियंत्रण | ड्राइवर जिम्मेदार |
| Level 2 | आंशिक ऑटोमेशन (जैसे ACC + Lane Keep) | निगरानी अनिवार्य | कोर्ट फैसला: ड्राइवर प्राइमरी |
| Level 3+ | कंडीशनल ऑटोमेशन | सीमित (भारत में नहीं उपलब्ध) | वर्तमान में प्रतिबंधित |
भारत में अभी अधिकांश कारें Level 2 तक ही ADAS प्रदान करती हैं, जैसे Mahindra XUV700, Tata Harrier, Hyundai Tucson, MG Hector आदि में। कोर्ट ने इनमें ड्राइवर को सतर्क रहने का आदेश दिया है। यदि ड्राइवर ADAS पर भरोसा करके मोबाइल इस्तेमाल करता है या ध्यान भटकाता है, तो यह लापरवाही मानी जाएगी।
क्यों बढ़ रहा है ADAS का दुरुपयोग?
भारतीय सड़कों की जटिलता (मिश्रित ट्रैफिक, फीकी लेन मार्किंग, अप्रत्याशित व्यवहार) के कारण कई ADAS सिस्टम फॉल्स अलर्ट देते हैं। इससे ड्राइवर इन्हें बंद कर देते हैं या इन पर अधिक भरोसा करते हैं। लेकिन कोर्ट ने चेतावनी दी है कि फीचर बंद करना या उस पर आंख मूंदकर भरोसा करना भी दंडनीय हो सकता है।
2026 से भारी वाहनों (8+ सीटों वाली पैसेंजर गाड़ियां, बसें, ट्रक) में AEBS (Automatic Emergency Braking System), DDAWS (Driver Drowsiness Attention Warning), LDWS (Lane Departure Warning) अनिवार्य होने जा रहे हैं। लेकिन ये भी ड्राइवर की जिम्मेदारी नहीं हटाएंगे।
क्या करें ADAS इस्तेमाल करने वाले ड्राइवर?
हमेशा हाथ स्टियरिंग पर रखें और आंखें सड़क पर।
ADAS को सपोर्ट मानें, न कि ऑटोपायलट।
फॉल्स अलर्ट पर सिस्टम बंद न करें; मैन्युअल ड्राइविंग प्रैक्टिस करें।
लंबी ड्राइव में हर 2 घंटे में ब्रेक लें।
दुर्घटना होने पर ADAS डेटा (अगर उपलब्ध) जांच में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन ड्राइवर की लापरवाही साबित होने पर सजा तय।
बच्चों या यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीटबेल्ट और चाइल्ड सीट अनिवार्य।
यह फैसला सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। भारत में हर साल लाखों दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें से कई ADAS फीचर्स से रोकी जा सकती हैं, बशर्ते ड्राइवर जिम्मेदार बने। ADAS का सही इस्तेमाल जानें, ताकि जेल और जुर्माने से बचा जा सके।