चप्पल या स्लिपर पहनकर कार चलाने पर भारत में कोई सीधा चालान नहीं कटता है। मोटर व्हीकल एक्ट में इसकी कोई स्पष्ट मनाही नहीं है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस अक्सर सड़क सुरक्षा के नाम पर चेतावनी देती है क्योंकि चप्पल फिसलने, ब्रेक-एक्सीलरेटर पर कंट्रोल खोने या आपात स्थिति में गलती का कारण बन सकती है। दोपहिया वाहनों पर स्थिति थोड़ी अलग है, जहां गियर बदलने में समस्या होने पर कुछ राज्यों में जुर्माना लगाया जा सकता है।
चप्पल पहनकर कार चलाने पर कटेगा चालान? ट्रैफिक पुलिस ने बताई वजह और नियम
भारत में ट्रैफिक नियमों को लेकर लोगों में कई भ्रम फैले हुए हैं। सबसे आम भ्रमों में से एक है – चप्पल या स्लिपर पहनकर कार चलाने पर चालान कट जाता है । कई लोग मानते हैं कि पुलिस इसे देखते ही 500 से 2000 रुपये तक का जुर्माना लगा देती है। लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है।
मोटर व्हीकल एक्ट 1988 और उसमें 2019 में हुए संशोधनों में केवल चप्पल पहनने के आधार पर कोई अलग धारा या जुर्माना निर्धारित नहीं किया गया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने कई बार स्पष्ट किया है कि चप्पल, सैंडल, आधी बांह की शर्ट, लुंगी या बनियान पहनकर वाहन चलाने पर कोई कानूनी चालान नहीं काटा जा सकता। यह नियम चार पहिया वाहनों (कार, जीप, SUV) पर पूरी तरह लागू होता है।
ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से बात करने पर पता चलता है कि वे चप्पल पहनने पर चालान नहीं , बल्कि सुरक्षा के लिए चेतावनी देते हैं। वजहें ये हैं:
चप्पल में पैर फिसल सकता है, खासकर बारिश में या पसीना आने पर
ब्रेक, क्लच और एक्सीलरेटर पेडल पर सही पकड़ नहीं बन पाती
अचानक ब्रेक लगाने या गियर बदलने में देरी हो सकती है
आपातकाल में पैर तेजी से नहीं हिल पाता, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ता है
यही वजह है कि कई ट्रैफिक पुलिसकर्मी गाड़ी रोककर सलाह देते हैं – “साहब, जूते पहन लीजिए, सुरक्षित रहेगा।” लेकिन अगर आप केवल चप्पल में हैं और कोई अन्य उल्लंघन नहीं किया है, तो वे सीधे चालान नहीं काट सकते।
दोपहिया वाहनों पर नियम थोड़े सख्त क्यों?
दोपहिया वाहनों (बाइक, स्कूटर) के मामले में स्थिति अलग है। गियर वाली बाइकों में बाएं पैर से गियर बदलना पड़ता है। चप्पल या खुले सैंडल में:
गियर पैडल पर पैर फिसल सकता है
ब्रेक लगाने में देरी हो सकती है
पैर में चोट लगने का खतरा ज्यादा रहता है
कुछ राज्यों और शहरों में ट्रैफिक पुलिस सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के तहत (धारा 184 – खतरनाक ड्राइविंग या धारा 177 – सामान्य उल्लंघन) चालान काट देती है। ऐसे मामलों में जुर्माना 500 से 1000 रुपये तक हो सकता है, खासकर अगर पहली बार पकड़े गए हों। दोबारा पकड़े जाने पर राशि बढ़ सकती है।
जुर्माने की राशि और धाराएं (सिर्फ संदर्भ के लिए)
ट्रैफिक पुलिस क्या कहती है?
| उल्लंघन का प्रकार | संभावित धारा | पहली बार जुर्माना | दोबारा जुर्माना | लागू वाहन |
|---|---|---|---|---|
| केवल चप्पल पहनकर कार चलाना | कोई स्पष्ट धारा नहीं | 0 रुपये | 0 रुपये | चार पहिया |
| चप्पल में खतरनाक ड्राइविंग साबित | धारा 184 | 1000-2000 रुपये | 2000-5000 + लाइसेंस निलंबन | सभी वाहन |
| दोपहिया में गियर/ब्रेक कंट्रोल खोना | धारा 177 / 184 | 500-1000 रुपये | 1500-3000 रुपये | दोपहिया |
| सामान्य ट्रैफिक उल्लंघन | धारा 177 | 500 रुपये | 1500 रुपये | सभी |
नोएडा, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों के कई ट्रैफिक अफसरों ने हाल के बयानों में साफ किया है:
“चप्पल पहनना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन सुरक्षित भी नहीं है। अगर चप्पल की वजह से कोई हादसा होता है तो ड्राइवर की जिम्मेदारी बनती है। हम ज्यादातर लोगों को समझाते हैं, चालान तभी काटते हैं जब कोई और गंभीर गलती साथ में हो।”
क्या पहनना सबसे सुरक्षित है?
ट्रैफिक विशेषज्ञ और रोड सेफ्टी एक्सपर्ट सलाह देते हैं:
बंद जूते या स्पोर्ट्स शूज पहनें
ऐसे जूते चुनें जिनका तलवा फिसलन-रोधी हो
ऊँची एड़ी वाली सैंडल या हील्स से बचें
बारिश के दिनों में विशेष सावधानी बरतें
अंत में, नियम साफ है – कार में चप्पल पहनने पर चालान नहीं कटेगा , लेकिन अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए जूते पहनना ही सबसे समझदारी भरा फैसला है। ट्रैफिक पुलिस भी यही उम्मीद करती है कि ड्राइवर खुद जिम्मेदारी दिखाएंगे।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी और मौजूदा ट्रैफिक नियमों के आधार पर तैयार किया गया है। स्थानीय नियमों में अंतर हो सकता है।