“HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पिछले दो वर्षों में बैंक की कुछ घटनाओं और कार्यप्रणालियों को अपने व्यक्तिगत मूल्यों व नैतिकता से असंगत बताते हुए यह कदम उठाया। बैंक ने केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया है, जिससे शेयर में 8-9% तक की भारी गिरावट आई और बाजार पूंजीकरण में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।”
HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा
देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक HDFC बैंक में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतनु चक्रवर्ती ने 18 मार्च 2026 को तत्काल प्रभाव से अपना पद छोड़ दिया। उनके इस्तीफे का मुख्य कारण बैंक की आंतरिक कुछ घटनाओं और प्रथाओं को अपने व्यक्तिगत मूल्यों एवं नैतिकता से असंगत बताना है।
चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफा पत्र में स्पष्ट लिखा कि पिछले दो वर्षों से उन्होंने बैंक में कुछ ऐसी प्रथाओं को देखा है जो उनकी नैतिक मान्यताओं से मेल नहीं खातीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस्तीफे का यही एकमात्र आधार है और कोई अन्य सामग्री कारण नहीं है। चक्रवर्ती 2021 से इस पद पर थे और मई 2024 में उनकी पुनर्नियुक्ति तीन वर्ष के लिए हुई थी, जो मई 2027 तक चलनी थी।
बैंक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूर्व HDFC लिमिटेड के वाइस चेयरमैन केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस नियुक्ति को तीन महीने की अवधि के लिए मंजूरी दे दी है, जो 19 मार्च 2026 से प्रभावी है। मिस्त्री बोर्ड में पहले से नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में मौजूद थे।
इस घटना के बाद गुरुवार को HDFC बैंक के शेयर में भारी गिरावट देखी गई। बाजार खुलते ही शेयर 8-9% तक टूटकर 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे बैंक की बाजार पूंजीकरण में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। यह गिरावट 2020 के COVID क्रैश के बाद एक दिन में सबसे बड़ी मानी जा रही है। हालांकि बाद में कुछ सुधार हुआ, लेकिन निवेशकों में चिंता बनी हुई है।
बैंक ने स्पष्ट किया है कि चक्रवर्ती के इस्तीफे का RBI या किसी नियामकीय चिंता से कोई संबंध नहीं है। न ही यह किसी गवर्नेंस उल्लंघन या अनुपालन मुद्दे से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार यह पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय था, जिसमें सीनियर मैनेजमेंट के साथ मतभेद की भूमिका रही। बैंक ने चक्रवर्ती के योगदान की सराहना की और कहा कि उनके इस्तीफे से बैंक के संचालन पर कोई सामग्री प्रभाव नहीं पड़ेगा।
चक्रवर्ती के इस्तीफे में 2022 में HDFC लिमिटेड के साथ हुए विलय का भी जिक्र है। उन्होंने कहा कि विलय के लाभ अभी पूरी तरह से प्राप्त नहीं हुए हैं। यह विलय भारत के बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा था, जिसने HDFC बैंक को बाजार पूंजीकरण में शीर्ष पर पहुंचाया था, लेकिन एकीकरण की चुनौतियां बनी हुई हैं।
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
|---|---|
| इस्तीफा देने वाले | अतनु चक्रवर्ती (पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर) |
| इस्तीफा तिथि | 18 मार्च 2026 (तत्काल प्रभाव से) |
| कारण | बैंक की कुछ प्रथाएं व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से असंगत |
| अंतरिम चेयरमैन | केकी मिस्त्री (तीन महीने के लिए, RBI मंजूरी प्राप्त) |
| शेयर प्रभाव | 8-9% गिरावट, बाजार पूंजीकरण में ~1 लाख करोड़ की कमी |
| अन्य स्पष्टीकरण | कोई RBI चिंता, गवर्नेंस मुद्दा या अनुपालन समस्या नहीं |
यह घटना भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में नेतृत्व स्थिरता पर सवाल उठा रही है, खासकर जब बैंक पोस्ट-मर्जर ग्रोथ फेज में है। निवेशक अब अगले कुछ दिनों में बैंक की प्रतिक्रिया और संभावित स्थायी चेयरमैन की नियुक्ति पर नजर रखेंगे।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और बाजार प्रतिक्रिया पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं।