“ट्रंप प्रशासन ने चीन के सोलर पैनल ओवरकैपेसिटी और डंपिंग ट्रैप को लक्ष्य बनाते हुए सेक्शन 301 जांच शुरू की है, जिसमें भारत सहित कई देश शामिल हैं। चीन से सस्ते पैनल भारत के जरिए रूट होकर अमेरिका पहुंच रहे थे, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। भारत अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और एंटी-डंपिंग ड्यूटी से खुद को बचा सकता है।”
चीन के सोलर पैनल ट्रैप पर ट्रंप का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने चीन के सोलर सेक्टर में ओवरप्रोडक्शन और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मार्च 2026 में यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने ट्रेड एक्ट 1974 की सेक्शन 301 के तहत 16 देशों के खिलाफ जांच शुरू की, जिसमें चीन मुख्य निशाने पर है। यह जांच मैन्युफैक्चरिंग में स्ट्रक्चरल एक्सेस कैपेसिटी पर फोकस कर रही है, खासकर सोलर मॉड्यूल, बैटरी और अन्य एनर्जी गुड्स में।
चीन वैश्विक सोलर पैनल मार्केट का 80% से ज्यादा कंट्रोल करता है। वहां की कंपनियां सरकारी सब्सिडी से कम कीमत पर उत्पादन कर रही हैं, जिसे ‘डंपिंग’ कहा जाता है। यह ट्रैप कई देशों में लोकल मैन्युफैक्चरर्स को नुकसान पहुंचा रहा है। अमेरिका पहले ही चीनी सोलर प्रोडक्ट्स पर 60% तक टैरिफ लगा चुका है, और अब नई जांच से टैरिफ और बढ़ सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि चीन का यह ओवरकैपेसिटी अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी और इकोनॉमिक रेजिलिएंस को खतरा है। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद कुछ टैरिफ रद्द हुए थे, लेकिन ट्रंप ने सेक्शन 122 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लगाए, जो अब सेक्शन 301 जांच से परमानेंट हो सकते हैं। सोलर सेक्टर में चीन के खिलाफ पहले से एंटी-डंपिंग और काउंटरवेलिंग ड्यूटी चल रही हैं, जो अब और सख्त हो रही हैं।
भारतीय कंपनियां रडार पर क्यों?
भारत भी इस जांच में शामिल है क्योंकि अमेरिकी जांच में पाया गया कि चीन के सोलर सेल्स और मॉड्यूल्स भारत के जरिए री-रूट होकर अमेरिका पहुंच रहे हैं। इससे चीनी कंपनियां पहले के हाई टैरिफ से बच रही हैं। फरवरी 2026 में अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट ने भारत, इंडोनेशिया और लाओस से सोलर इंपोर्ट्स पर अनफेयर सब्सिडी का प्रारंभिक फैसला दिया, जिसके तहत भारतीय सोलर प्रोडक्ट्स पर 125.87% तक काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाई गई।
यह ड्यूटी इसलिए लगी क्योंकि भारत सरकार की PLI स्कीम और अन्य इंसेंटिव्स को अमेरिका ने अनुचित सब्सिडी माना। 2022 में भारत से अमेरिका सोलर एक्सपोर्ट सिर्फ 83 मिलियन डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर 792 मिलियन डॉलर हो गया। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से चीन से बचाव के लिए हुई, लेकिन अब भारत के मैन्युफैक्चरर्स को अमेरिकी मार्केट में भारी नुकसान हो रहा है।
भारत कैसे बचेगा और मजबूत बनेगा?
भारत के लिए यह चुनौती भी अवसर है। सरकार पहले से ही आत्मनिर्भर भारत अभियान चला रही है।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी : फरवरी 2026 में DGTR ने चीन से सोलर सेल इंपोर्ट्स पर 30% तक एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा दी, जो तीन साल के लिए है। इससे डंपिंग मार्जिन 105-115% तक था, लेकिन अब लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलेगा।
PLI स्कीम का विस्तार : 48.3 GW कैपेसिटी की यूनिट्स को कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं। 2027-28 तक भारत सोलर सेल में काफी हद तक आत्मनिर्भर हो जाएगा।
ALMM-II नियम : जून 2026 से ज्यादातर प्रोजेक्ट्स में मेड इन इंडिया सेल्स का इस्तेमाल अनिवार्य होगा।
चीन निर्भरता में कमी : 2023-24 में चीन से सोलर इंपोर्ट 2.85 अरब डॉलर था, जो 2024-25 में घटकर 1.7 अरब डॉलर रह गया।
घरेलू उत्पादन बढ़ाएं : कंपनियां जैसे Adani Solar, Waaree, Vikram Solar और Tata Power अब बड़े स्केल पर सेल और मॉड्यूल बना रही हैं।
एक्सपोर्ट डाइवर्सिफिकेशन : अमेरिका के अलावा यूरोप, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में फोकस बढ़ाएं।
सप्लाई चेन मजबूत करें : पॉलीसिलिकॉन से लेकर वेफर तक लोकल प्रोडक्शन बढ़ाएं, ताकि चीन पर निर्भरता खत्म हो।
यह एक्शन वैश्विक सोलर मार्केट को रीशेप कर रहा है। भारत अगर तेजी से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाए तो 2030 तक ग्लोबल प्लेयर बन सकता है। लेकिन देरी हुई तो चीन का ट्रैप और गहरा सकता है।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट वर्तमान ट्रेड डेवलपमेंट्स और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।