“एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से निकले वी. वैद्यनाथन ने पायलट बनने का सपना चूर-चूर होते देख फ्रिज बेचकर शुरुआत की, लेकिन दृढ़ संकल्प से उन्होंने कैपिटल फर्स्ट को सफल NBFC बनाया और IDFC बैंक के साथ विलय कर IDFC First Bank को खड़ा किया, जिसकी मार्केट कैप आज लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुकी है। उनकी कहानी प्रेरणा देती है कि असफलताएं ही सफलता की सीढ़ी बन सकती हैं।”
वी. वैद्यनाथन: सपनों से संघर्ष तक का सफर
वी. वैद्यनाथन का जन्म 2 जनवरी 1968 को हुआ था। बचपन से ही उनका सपना भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनने का था। उन्होंने इसके लिए पूरी तैयारी की, लेकिन मेडिकल टेस्ट में एक छोटी सी समस्या के कारण उनका सपना टूट गया। परिवार ने इलाज के लिए घर का फ्रिज तक बेच दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली। यह झटका उनके लिए बड़ा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
शुरुआती दिनों में उन्होंने विभिन्न छोटे-मोटे काम किए, जिसमें फ्रिज और एयर कंडीशनर जैसे घरेलू उपकरण बेचना भी शामिल था। यह दौर उनके लिए संघर्ष का था, जहां उन्होंने ग्राउंड लेवल पर ग्राहकों की जरूरतों को समझा और बिक्री कौशल सीखा।
1990 में उन्होंने सिटीबैंक में कंज्यूमर बैंकिंग से करियर शुरू किया, जहां उन्होंने 10 साल तक काम किया। यहां उन्होंने रिटेल बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड जैसे क्षेत्रों में गहरी समझ विकसित की। 2000 में वे आईसीआईसीआई बैंक में शामिल हुए और वहां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2006 में वे आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड में शामिल हुए, लेकिन उनका मन हमेशा अपना कुछ बड़ा करने में लगा रहा।
2010 के आसपास उन्होंने अपना बड़ा कदम उठाया। उन्होंने एक छोटी, घाटे में चल रही लिस्टेड NBFC में हिस्सेदारी खरीदी। घर गिरवी रखकर, शेयरों पर लोन लेकर उन्होंने इस कंपनी को कैपिटल फर्स्ट में तब्दील किया। शुरुआत में कंपनी का रिटेल लोन बुक महज 94 करोड़ रुपये था। लेकिन वैद्यनाथन ने अंडरसर्व्ड छोटे उद्यमियों को लोन देने पर फोकस किया। उन्होंने टैलेंट को आकर्षित किया, प्राइवेट इक्विटी निवेशकों को साथ जोड़ा और कंपनी को घाटे से मुनाफे में लाया।
2018 तक कैपिटल फर्स्ट का रिटेल लोन बुक 32,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया था और कंपनी मुनाफे में चल रही थी। वैद्यनाथन ने हमेशा यूनिवर्सल बैंक बनने का सपना देखा था। 2017 के अंत में आईडीएफसी बैंक के तत्कालीन एमडी राजीव लॉल ने उनसे संपर्क किया। एक ब्रंच में इडली-खिचड़ी खाते हुए दोनों ने विलय की बात शुरू की। 2018 में IDFC बैंक और कैपिटल फर्स्ट का विलय हुआ, जिसमें IDFC बैंक ने कैपिटल फर्स्ट के हर 10 शेयर के बदले 139 शेयर दिए। इस विलय से IDFC First Bank का जन्म हुआ और वैद्यनाथन इसके एमडी एवं सीईओ बने।
विलय के समय IDFC बैंक का ज्यादातर बुक होलसेल था और कई स्ट्रेस्ड एसेट्स थे, जबकि कैपिटल फर्स्ट रिटेल में मजबूत था। वैद्यनाथन ने बैंक को रिटेल फोकस्ड बनाया। उन्होंने CASA (करंट अकाउंट-सेविंग अकाउंट) बढ़ाने, डिपॉजिट ग्रोथ, PSL (प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग) और रूरल बैंकिंग पर जोर दिया।
IDFC First Bank की वर्तमान स्थिति
आज IDFC First Bank भारत के प्रमुख प्राइवेट सेक्टर बैंकों में शुमार है। फरवरी 2026 तक बैंक की मार्केट कैप लगभग 60,000 करोड़ रुपये के स्तर पर है (विभिन्न एक्सचेंज डेटा के अनुसार 59,000 से 71,000 करोड़ के बीच उतार-चढ़ाव के साथ)। बैंक का लोन बुक और डिपॉजिट तेजी से बढ़ा है।
बैंक ने रिटेल, MSME, एग्री और कॉरपोरेट सेगमेंट में बैलेंस्ड ग्रोथ हासिल की है। हाल के वर्षों में बैंक ने टेक्नोलॉजी, डिजिटल बैंकिंग और कस्टमर सर्विस पर फोकस किया है। वैद्यनाथन ने 21 प्रमुख मेट्रिक्स पर टारगेट सेट किए थे, जिनमें से अधिकांश पूरे हो चुके हैं। बैंक अब प्रॉफिटेबल है और ग्रोथ ट्रैजेक्टरी मजबूत है।
वैद्यनाथन की खासियतें और योगदान
उन्होंने कर्मचारियों और घरेलू मददगारों को बैंक के शेयर गिफ्ट किए, जैसे 2022 में चालक और हेल्पर को लाखों के शेयर दिए।
बैंक में फ्रॉड जैसे मामलों में पारदर्शिता बरती, जैसे हालिया चंडीगढ़ ब्रांच में 590 करोड़ के फ्रॉड पर तुरंत जांच और सुधार के कदम।
उनकी लीडरशिप में बैंक ने रिटेल बैंकिंग में मजबूत पोजिशन बनाई है।
मार्केट कैप स्नैपशॉट (फरवरी 2026)
| पैरामीटर | मूल्य (लगभग) |
|---|---|
| मार्केट कैप | 60,000 करोड़ रुपये |
| शेयर प्राइस रेंज | 68-83 रुपये (हालिया) |
| P/E रेशियो | 38-45x |
| बुक वैल्यू | 40+ रुपये |
वी. वैद्यनाथन की कहानी बताती है कि सपने टूट सकते हैं, लेकिन नया सपना देखकर और मेहनत से उसे पूरा किया जा सकता है। फ्रिज बेचने से बैंकिंग एम्पायर तक का सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है। इसमें दी गई जानकारी सार्वजनिक उपलब्ध डेटा पर आधारित है। निवेश से पहले अपनी जांच करें।