1 अप्रैल से बदलेंगे टैक्स फाइलिंग के कई नियम, इन 7 सवालों से करें हर कंफ्यूजन दूर; नहीं होगी कोई गलती

“1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स रूल्स में आईटीआर फॉर्म्स को सरल बनाया गया है, जिसमें प्री-फिलिंग और रीकॉन्सिलेशन फीचर्स शामिल हैं। शेयर बायबैक पर कैपिटल गेंस टैक्स लगेगा, एसटीटी रेट्स बढ़ेंगे, और रिवाइज्ड रिटर्न की समय सीमा बढ़ाई गई है। ये बदलाव कंप्लायंस को आसान बनाने और टैक्सपेयर्स की गलतियां कम करने के लिए हैं, जिसमें नई टैक्स रिजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को बढ़ाने का प्रावधान भी है।”

नए इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत आईटीआर फाइलिंग में कई बड़े बदलाव हो रहे हैं, जो टैक्सपेयर्स के लिए कंप्लायंस को आसान बनाएंगे। ड्राफ्ट रूल्स में स्मार्ट फॉर्म्स का प्रावधान है, जो ऑटोमैटिक डेटा प्री-फिलिंग और रीकॉन्सिलेशन की सुविधा देंगे। इससे फॉर्म 26AS और AIS से डेटा मैचिंग आसान हो जाएगी, और गलतियां कम होंगी।

सवाल 1: नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 में क्या मुख्य बदलाव हैं? इनकम टैक्स एक्ट 2025, जो 1961 के पुराने एक्ट को रिप्लेस करेगा, में टैक्स ईयर की कॉन्सेप्ट इंट्रोड्यूस की गई है। यह डिजिटल-फर्स्ट कंप्लायंस पर फोकस करता है, जिसमें डिटेल्ड आईटीआर फॉर्म्स होंगे जो ह्यूमन एरर्स कम करेंगे। एक्ट में 536 सेक्शंस हैं, जो पुराने 4,000+ प्रावधानों से सरल हैं। इससे ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और फाइलिंग प्रोसेस फास्टर होगा। उदाहरण के लिए, टैक्सपेयर्स को अब ऑनलाइन वेरिफिकेशन के लिए ज्यादा ऑप्शंस मिलेंगे, जैसे आधार-लिंक्ड ई-साइन।

सवाल 2: आईटीआर फॉर्म्स में क्या सिम्प्लिफिकेशन हो रहा है? नए रूल्स में आईटीआर फॉर्म्स को रीडिजाइन किया गया है, जिसमें प्री-फिल्ड डेटा जैसे सैलरी, इंटरेस्ट और डिविडेंड इनकम ऑटोमैटिकली शामिल होंगे। रीकॉन्सिलेशन फीचर से टैक्सपेयर्स को डिस्क्रेपेंसी हाईलाइट मिलेगी, जैसे अगर फॉर्म 16 और 26AS में मिसमैच हो। इससे कंप्लायंस बोझ कम होगा, और ऑर्डिनरी सिटीजन बिना एक्सपर्ट हेल्प के फाइल कर सकेंगे। फॉर्म्स अब स्टैंडर्डाइज्ड होंगे, जिसमें सेक्शन-वाइज ब्रेकडाउन होगा।

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आईटीआर फॉर्म टाइपमुख्य बदलावकिसके लिए लागू
ITR-1 (Sahaj)प्री-फिलिंग बढ़ाई गई, सैलरी और इंटरेस्ट इनकम तक सीमितसैलरीड इंडिविजुअल्स, इनकम ₹50 लाख तक
ITR-2कैपिटल गेंस और फॉरेन इनकम के लिए रीकॉन्सिलेशन ऐडेडHUF और इंडिविजुअल्स विदाउट बिजनेस
ITR-3बिजनेस इनकम के लिए ऑटो-कैलकुलेशन ऑफ डिडक्शंसपार्टनरशिप फर्म्स और प्रोफेशनल्स
ITR-4 (Sugam)प्री-फिल्ड GST डेटा इंटीग्रेशनछोटे बिजनेस, टर्नओवर ₹2 करोड़ तक

सवाल 3: नई टैक्स रिजीम में एग्जेम्प्शन लिमिट क्या होगी? नई टैक्स रिजीम में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को ₹12 लाख तक बढ़ाया जा सकता है, जो मिडल-इनकम ग्रुप्स के लिए राहत देगी। पुरानी रिजीम में सेक्शन 80C और 80D के लिमिट्स में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन नई रिजीम एग्जेम्प्शन-फ्री स्ट्रक्चर पर फोकस करती है। इससे टैक्स कैलकुलेशन सरल होगा, और टैक्सपेयर्स को ऑप्शन मिलेगा कि वे पुरानी या नई रिजीम चुनें। उदाहरण: अगर आपकी इनकम ₹10 लाख है, तो नई रिजीम में टैक्स जीरो हो सकता है, जबकि पुरानी में डिडक्शंस पर डिपेंड करेगा।

सवाल 4: शेयर बायबैक पर टैक्सेशन कैसे बदलेगा? शेयर बायबैक अब कैपिटल गेंस के रूप में टैक्स्ड होगा, जो लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स के लिए फायदेमंद है। पहले यह डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के तहत था, लेकिन अब इंडिविजुअल टैक्स स्लैब पर लगेगा। अगर होल्डिंग पीरियड 1 साल से ज्यादा है, तो 12.5% LTCG रेट लागू होगा। इससे कंपनियों को बायबैक आसान होगा, और इनवेस्टर्स को टैक्स प्लानिंग के बेहतर ऑप्शन मिलेंगे। मिसाल के तौर पर, अगर ₹1 लाख का बायबैक प्रॉफिट है, तो LTCG पर सिर्फ ₹12,500 टैक्स बनेगा।

कुंजी पॉइंट्स शेयर बायबैक टैक्सेशन पर:

कैपिटल गेंस क्लासिफिकेशन: डिविडेंड से शिफ्ट।

STCG रेट: 20% अगर होल्डिंग 1 साल से कम।

इंडेक्सेशन बेनिफिट: उपलब्ध नहीं, लेकिन स्लैब रेट्स लागू।

कंपनियों के लिए: कोई DDT, सिर्फ शेयरहोल्डर्स पर टैक्स।

प्रभाव: मार्केट में बायबैक एक्टिविटी बढ़ सकती है।

सवाल 5: सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में क्या बढ़ोतरी हो रही है? इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर STT रेट बढ़ाया गया है, जो ट्रेडर्स को प्रभावित करेगा। फ्यूचर्स पर STT अब 0.02% से बढ़कर 0.03% हो सकता है, जबकि ऑप्शंस पर 0.0625% से 0.1%। यह स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को डिस्करेज करेगा, लेकिन लॉन्ग-टर्म इनवेस्टमेंट को प्रमोट करेगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स सेकंडरी मार्केट से खरीदने पर स्ट्रिक्टर रूल्स होंगे, जिसमें इंडेक्सेशन बेनिफिट्स सीमित होंगे।

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एसटीटी कैटेगरीपुराना रेटनया रेटप्रभाव
इक्विटी डिलीवरी0.1%0.1%कोई बदलाव नहीं
इक्विटी इंट्राडे0.025%0.025%कोई बदलाव नहीं
फ्यूचर्स0.02%0.03%ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ेगी
ऑप्शंस0.0625%0.1%स्पेकुलेशन कम होगा

सवाल 6: टीसीएस और रेमिटेंस पर क्या नए रूल्स हैं? ओवरसीज एजुकेशन और मेडिकल रेमिटेंस पर टीसीएस रेट कम किया गया है, जो स्टूडेंट्स और पेशेंट्स के लिए राहत है। अब 5% TCS लागू होगा अगर अमाउंट ₹7 लाख से ज्यादा है, पहले 20% था। इससे फॉरेन पेमेंट्स आसान होंगे। साथ ही, अपडेटेड रिटर्न फाइल करने की टाइम लिमिट 24 महीने से बढ़ाकर 48 महीने की गई है, जिसमें एडिशनल टैक्स रेट टाइम पर डिपेंड करेगा।

सवाल 7: रिवाइज्ड रिटर्न की समय सीमा में क्या बदलाव है? रिवाइज्ड रिटर्न अब असेसमेंट ईयर के 끝 से 12 महीने तक फाइल किया जा सकता है, पहले 9 महीने था। अपडेटेड रिटर्न के लिए 48 महीने की लिमिट है, जो वॉलंटरी कंप्लायंस को बढ़ावा देगी। अगर 24 महीने के अंदर फाइल करते हैं, तो 25% एडिशनल टैक्स, उसके बाद 50%। इससे टैक्सपेयर्स को पुरानी गलतियां सुधारने का ज्यादा समय मिलेगा, और पेनल्टी कम होगी अगर जल्दी सुधारें।

रिटर्न टाइपपुरानी लिमिटनई लिमिटएडिशनल टैक्स रेट
रिवाइज्ड9 महीने12 महीनेकोई एडिशनल नहीं
अपडेटेड24 महीने48 महीने25-50% डिपेंडिंग ऑन टाइम

ये बदलाव टैक्स सिस्टम को मॉडर्न और यूजर-फ्रेंडली बनाएंगे, जिससे हर टैक्सपेयर बिना कंफ्यूजन के फाइल कर सके।

Disclaimer: यह न्यूज, रिपोर्ट्स और टिप्स पर आधारित है।

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