“भारत सरकार ने छोटी कारों के लिए प्रस्तावित एमिशन छूट को रद्द कर दिया है, जो अप्रैल 2027 से पांच साल के लिए लागू होंगे। इससे ऑटोमेकर्स की उत्पाद रणनीति प्रभावित होगी, छोटी कारों की कीमतें बढ़ सकती हैं, और बाजार में ईवी तथा हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा मिलेगा।”
भारत सरकार ने कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) नियमों के नए ड्राफ्ट में छोटी कारों के लिए प्रस्तावित छूट को खत्म कर दिया है। ये नियम अप्रैल 2027 से लागू होकर 2032 तक चलेंगे, जिससे ऑटो इंडस्ट्री में बड़े बदलाव आने की उम्मीद है। पहले ड्राफ्ट में 909 किलोग्राम से कम वजन वाली पेट्रोल कारों को CO2 उत्सर्जन में 3 ग्राम प्रति किलोमीटर की छूट देने का प्रस्ताव था, लेकिन टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों की आपत्तियों के बाद इसे हटा दिया गया। इससे मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां प्रभावित होंगी, जो छोटी कार मार्केट में 95 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा रखती हैं।
नए नियमों के तहत, सभी वाहनों के लिए एक समान उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा, जो फ्यूल कंजम्पशन को 2027 में 3.73 लीटर प्रति 100 किलोमीटर से घटाकर 2032 तक 3.01 लीटर प्रति 100 किलोमीटर तक लाएगा। यह WLTP (Worldwide Harmonised Light Vehicle Test Procedure) टेस्टिंग पर आधारित होगा, जो पुराने MIDC साइकल से ज्यादा सख्त है। इससे छोटी कारों को अनुपालन के लिए ज्यादा निवेश करना पड़ेगा, जैसे इंजन अपग्रेड, लाइटवेट मटेरियल्स का इस्तेमाल या हाइब्रिड टेक्नोलॉजी अपनाना।
नए CAFE नियमों का प्रभाव ऑटोमेकर्स पर
ऑटोमेकर्स को अपनी पूरी फ्लीट के एवरेज उत्सर्जन को नियंत्रित रखना होगा। अगर कोई कंपनी लक्ष्य से चूकती है, तो उसे जुर्माना भरना पड़ेगा, जो प्रति ग्राम अतिरिक्त CO2 के लिए 25,000 रुपये तक हो सकता है। इससे कंपनियों की प्रोडक्ट स्ट्रैटेजी बदल जाएगी। उदाहरण के लिए, मारुति सुजुकी को Alto, WagonR और Swift जैसे मॉडल्स में बदलाव करने होंगे, जबकि टाटा और महिंद्रा SUV सेगमेंट पर फोकस कर सकेंगी। Hyundai और Kia जैसी कंपनियां, जो पहले से हाइब्रिड और EV पर काम कर रही हैं, को फायदा होगा।
एक अनुमान के मुताबिक, छोटी कार सेगमेंट में 10-15 प्रतिशत कीमत वृद्धि हो सकती है, क्योंकि कंपनियों को अनुपालन लागत को पास ऑन करना पड़ेगा। FY25 में छोटी कारों की बिक्री कुल पैसेंजर व्हीकल मार्केट का 30 प्रतिशत थी, लेकिन नए नियमों से यह घटकर 20 प्रतिशत तक रह सकती है।
उपभोक्ताओं पर असर
छोटी कार खरीदारों के लिए ये नियम चुनौतीपूर्ण होंगे। एंट्री-लेवल कारों की कीमतें बढ़ने से पहली बार कार खरीदने वाले प्रभावित होंगे, खासकर ग्रामीण और सेमी-अर्बन इलाकों में। हालांकि, इससे ईको-फ्रेंडली विकल्पों को बढ़ावा मिलेगा। EV adoption बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि EV को CAFE कैलकुलेशन में जीरो एमिशन माना जाता है, जो कंपनियों को क्रेडिट देता है। सरकार की FAME-III स्कीम से EV की कीमतें कम हो सकती हैं, जिससे Tata Nexon EV या MG Comet जैसी छोटी EV पॉपुलर होंगी।
सुरक्षा के लिहाज से भी फायदेमंद, क्योंकि छोटी कारों को सख्त नियमों से मजबूत बनाना पड़ेगा, जैसे ज्यादा एयरबैग्स या ABS सिस्टम। लेकिन ईंधन की ऊंची कीमतों (पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर) के साथ, उपभोक्ता CNG या हाइब्रिड की ओर शिफ्ट कर सकते हैं।
तुलनात्मक तालिका: पुराने vs नए CAFE नियम
बाजार ट्रेंड्स और भविष्य की संभावनाएं
| पैरामीटर | CAFE-2 (2022-2027) | CAFE-3 (2027-2032) |
|---|---|---|
| फ्यूल कंजम्पशन लक्ष्य | 4.77 L/100km | 3.01 L/100km (2032 तक) |
| CO2 उत्सर्जन लक्ष्य | 113 g/km | 91.7 g/km |
| टेस्टिंग मेथड | MIDC | WLTP (सख्त) |
| छोटी कार छूट | कोई विशेष छूट नहीं | प्रस्तावित छूट रद्द |
| जुर्माना | 10,000 रुपये प्रति ग्राम | 25,000 रुपये प्रति ग्राम तक |
| EV इंसेंटिव | मल्टीप्लायर क्रेडिट | बढ़ा हुआ क्रेडिट |
इंडियन ऑटो मार्केट में SUV की हिस्सेदारी FY25 में 50 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है, जबकि छोटी कारें घट रही हैं। नए नियमों से यह ट्रेंड तेज होगा, क्योंकि SUV में हाइब्रिड आसानी से फिट हो जाते हैं। कंपनियां जैसे Toyota और Honda हाइब्रिड मॉडल्स लॉन्च कर रही हैं, जैसे Innova Hycross या City e:HEV। छोटी कार सेगमेंट में इन्नोवेशन बढ़ेगा, जैसे माइक्रो-हाइब्रिड सिस्टम या टर्बो इंजन।
ग्लोबल तुलना में, भारत के नियम EU और US से मिलते-जुलते हैं, जहां छोटे वाहनों को कुछ राहत मिलती है, लेकिन भारत में समान नियम अपनाए जा रहे हैं। इससे निर्यात बढ़ सकता है, क्योंकि भारतीय कारें ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से मैच करेंगी। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट 5-10 प्रतिशत बढ़ने से छोटे प्लेयर्स मुश्किल में पड़ सकते हैं।
प्रमुख पॉइंट्स: ऑटो इंडस्ट्री के लिए चुनौतियां
निवेश की जरूरत : कंपनियों को R&D पर 20-30 प्रतिशत ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।
सेगमेंट शिफ्ट : छोटी कारों से SUV और EV की ओर मूवमेंट।
उपभोक्ता विकल्प : CNG कारों की डिमांड बढ़ेगी, जैसे Maruti Celerio CNG (25 km/kg माइलेज)।
पर्यावरण लाभ : कुल CO2 उत्सर्जन में 15-20 प्रतिशत कमी की उम्मीद।
सरकारी सपोर्ट : PLI स्कीम से EV कंपोनेंट्स पर सब्सिडी।
मार्केट इंपैक्ट : FY27 में पैसेंजर व्हीकल सेल्स 4 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच सकती है, लेकिन छोटी कारें 1 मिलियन से नीचे।
ये बदलाव इंडियन ऑटो सेक्टर को ग्रीन मोबिलिटी की ओर ले जाएंगे, लेकिन छोटी कार मालिकों को तैयार रहना होगा। कंपनियां अब EV और हाइब्रिड पर फोकस करेंगी, जैसे Tata Punch EV या Hyundai i20 हाइब्रिड। इससे इंडस्ट्री में कॉम्पिटिशन बढ़ेगा, और उपभोक्ताओं को बेहतर, ईको-फ्रेंडली विकल्प मिलेंगे।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट, टिप्स और स्रोतों पर आधारित है।