“ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ का प्रस्ताव रखा है, जिससे भारत के अमेरिका से आयातित सामान जैसे बादाम, व्हिस्की और मिनरल फ्यूल महंगे हो सकते हैं; भारत अमेरिका से 2024 में 38.99 अरब डॉलर का सामान आयात करता है, जिसमें मिनरल फ्यूल 12.29 अरब डॉलर और मशीनरी 5.78 अरब डॉलर शामिल हैं; फैसले के पीछे व्यापार असंतुलन और रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करने की रणनीति है, जो भारत के 85 अरब डॉलर के निर्यात को प्रभावित कर सकती है।”
ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने वाला बिल समर्थन दिया है, जो भारत जैसे बड़े आयातकों को सीधे प्रभावित करेगा। भारत रूस से दूसरे सबसे बड़े क्रूड आयातक के रूप में जाना जाता है, और यह कदम अमेरिकी निर्यात को महंगा बनाकर भारतीय बाजार पर असर डालेगा।
भारत अमेरिका से मुख्य रूप से मिनरल फ्यूल, मशीनरी और ऑप्टिकल उपकरण आयात करता है। 2024 में कुल आयात मूल्य 38.99 अरब डॉलर रहा, जिसमें ऑक्टोबर 2025 तक 4.46 अरब डॉलर का मासिक औसत शामिल है। बादाम जैसे उत्पादों में अमेरिका का दबदबा है, जहां भारत के 93% बादाम आयात कैलिफोर्निया से आते हैं, जिनका मूल्य 2023 में 834 मिलियन डॉलर था। व्हिस्की आयात में भी bourbon whiskey प्रमुख है, जहां भारत ने हाल में ड्यूटी 150% से घटाकर 100% की, लेकिन नए टैरिफ से कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत के प्रमुख अमेरिकी आयात (2024 डेटा, मूल्य अरब डॉलर में):
| उत्पाद श्रेणी | आयात मूल्य | प्रतिशत हिस्सा |
|---|---|---|
| मिनरल फ्यूल, ऑयल | 12.29 | 31.5% |
| मशीनरी, न्यूक्लियर रिएक्टर | 5.78 | 14.8% |
| ऑप्टिकल, फोटो, मेडिकल उपकरण | 2.32 | 6.0% |
| बादाम और अन्य ट्री नट्स | 1.00 (अनुमानित) | 2.6% |
| व्हिस्की और स्पिरिट्स | 0.50 (अनुमानित) | 1.3% |
| अन्य (सोना, कोयला) | 17.10 | 43.8% |
ये आंकड़े संयुक्त राष्ट्र COMTRADE और OEC वर्ल्ड से लिए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिकी आयात भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हैं, लेकिन 500% टैरिफ से लागत 5 गुना बढ़ सकती है।
ट्रंप के फैसले के पीछे मुख्य कारण:
व्यापार असंतुलन: भारत अमेरिका को 85 अरब डॉलर निर्यात करता है, जबकि आयात केवल 39 अरब डॉलर का है, जिससे ट्रंप ने भारत को “टैरिफ किंग” कहा और रेसिप्रोकल टैरिफ की धमकी दी।
रूसी तेल पर दबाव: भारत रूस से क्रूड का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है; ट्रंप का बिल ऐसे देशों पर 500% ड्यूटी लगाएगा, जो रूसी ऊर्जा उत्पादों का व्यापार करते हैं, ताकि रूस की अर्थव्यवस्था कमजोर हो।
राष्ट्रीय सुरक्षा: अमेरिका का दावा है कि व्यापार घाटा और आपूर्ति श्रृंखला कमजोरियां आर्थिक आपात स्थिति पैदा करती हैं, जिसके तहत IEEPA कानून से टैरिफ लगाए जा रहे हैं।
ट्रेड डील की असफलता: अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया कि मोदी ने ट्रंप को कॉल नहीं किया, जिससे ट्रेड डील रुक गई; भारत ने इसे खारिज करते हुए 2025 में 8 बार बातचीत का जिक्र किया।
यदि बिल पास होता है, तो बादाम की कीमतें 30% से 100% बढ़ सकती हैं, जो पहले से ही 2025 में 190,000 टन आयात पर असर डालेगा। व्हिस्की जैसे लग्जरी उत्पादों में 100% ड्यूटी पहले से है, लेकिन अतिरिक्त टैरिफ से बाजार सिकुड़ सकता है। भारत ने अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाकर संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन सीनेट में वोट से स्थिति स्पष्ट होगी।
संभावित प्रभाव और रणनीतियां:
निर्यात क्षेत्रों जैसे आईटी, फार्मा और जेम्स में अस्थिरता, जहां स्टॉक मार्केट में 3 महीनों का सबसे बड़ा गिरावट दर्ज हुआ।
भारत वैकल्पिक स्रोत जैसे ऑस्ट्रेलिया से बादाम और स्कॉटलैंड से व्हिस्की की ओर मुड़ सकता है।
ट्रेड पॉलिसी फोरम के जरिए वार्ता तेज करने की जरूरत, जहां भारत ने पहले cranberries और lentils पर ड्यूटी कट ऑफर की।
Disclaimer: यह रिपोर्ट सामान्य सूचना के लिए है और निवेश या व्यापार सलाह नहीं मानी जानी चाहिए। डेटा उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है और परिवर्तनशील हो सकता है।