“भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 18% तक घटाया, जिससे रुपये में 1.4% की तेजी आई और यह 90.27 पर बंद हुआ। स्टॉक मार्केट में 2.5% का उछाल दर्ज हुआ, जबकि निर्यातकों को बड़ा फायदा मिला। समझौते में रूस से तेल खरीद रोकने और अमेरिकी सामान खरीदने की शर्तें शामिल हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी।”
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के बाद भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले मजबूत प्रदर्शन किया। समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया, जो दक्षिण एशिया और ASEAN देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी स्तर है। इस कटौती से भारतीय निर्यातकों को राहत मिली, खासकर उन क्षेत्रों में जहां टैरिफ बाधा बन रहे थे। रुपये की यह तेजी 1.38% रही, जो दिसंबर 2018 के बाद एक दिन में सबसे अधिक है। रुपये ने दिन की शुरुआत में 90.05 तक का स्तर छुआ और 90.27 पर बंद हुआ, जबकि पिछले बंद पर यह 91.52 पर था।
यह समझौता लंबे समय से चली आ रही वार्ताओं का नतीजा है, जिसमें अमेरिका ने रूस से तेल खरीद पर लगाए गए अतिरिक्त 25% पेनल्टी टैरिफ को भी हटा दिया। बदले में भारत ने रूस से क्रूड आयात रोकने और अमेरिकी सामानों की $500 बिलियन खरीद पर सहमति जताई। इस डील से भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश की वापसी की उम्मीद बढ़ी है, क्योंकि FII आउटफ्लो हाल के महीनों में $17 बिलियन तक पहुंच गया था।
समझौते के प्रमुख प्रावधान
अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ कटौती: 50% से 18% तक।
रूस से तेल आयात पर पेनल्टी हटाना: अतिरिक्त 25% टैरिफ समाप्त।
भारत की प्रतिबद्धता: अमेरिकी सामानों की खरीद बढ़ाना और रूस से क्रूड आयात बंद करना।
अन्य लाभ: भारतीय औद्योगिक सामानों पर टैरिफ जीरो तक लाना, जो पहले 13.5% था।
प्रभावित क्षेत्र: ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, फार्मा और IT सेक्टर में निर्यात बढ़ोतरी की संभावना।
समझौते से स्टॉक मार्केट में भी तेजी देखी गई। Nifty 50 इंडेक्स 2.5% ऊपर चढ़ा, जबकि Sensex में 4.5% तक की बढ़ोतरी दर्ज हुई। निर्यात आधारित कंपनियों जैसे Tata Motors, Reliance Industries और Infosys के शेयरों में 5-7% की तेजी आई। बॉन्ड मार्केट में 10-ईयर बेंचमार्क यील्ड 5 bps गिरकर 6.72% पर पहुंचा, जो निवेशकों के सकारात्मक सेंटिमेंट को दर्शाता है।
आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। टैरिफ कटौती से निर्यात में सालाना $2.4 ट्रिलियन का बाजार खुल सकता है, जो चीन, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकलने में मदद करेगा। रुपये की मजबूती से आयात बिल कम होगा, खासकर क्रूड ऑयल में, जो मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच बढ़ रहा था। हालांकि, रूस से सस्ते तेल की जगह अमेरिकी सामान लेने से शॉर्ट टर्म में कुछ लागत बढ़ सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
विश्लेषकों का अनुमान है कि रुपये 88-89 के स्तर तक पहुंच सकता है, अगर FII इनफ्लो Q1 FY26 में रिवर्स होता है। RBI की इंटरवेंशन भी सीमित रही, क्योंकि मार्केट सेंटिमेंट खुद मजबूत था। Moody’s ने चेतावनी दी कि रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद करने में समय लगेगा, जो आर्थिक ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है।
मार्केट रिएक्शन की तालिका
| सेक्टर/एसेट | पिछला बंद | आज का बंद | प्रतिशत बदलाव | प्रमुख कारण |
|---|---|---|---|---|
| USD/INR | 91.52 | 90.27 | -1.38% | टैरिफ कटौती से सेंटिमेंट बूस्ट |
| Nifty 50 | – | – | +2.5% | निर्यात स्टॉक्स में रैली |
| Sensex | – | – | +4.5% | FII रिटर्न की उम्मीद |
| 10-Year Bond Yield | – | 6.72% | -5 bps | बॉन्ड डिमांड बढ़ी |
| Tata Motors | – | – | +6.2% | ऑटो निर्यात लाभ |
| Infosys | – | – | +5.1% | IT सर्विसेज ग्रोथ |
राजनीतिक और उद्योग प्रतिक्रियाएं वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने इसे टैरिफ रिडक्शन का बड़ा कदम बताया, जबकि कॉमर्स मंत्री Piyush Goyal ने इसे ऐतिहासिक करार दिया। PM Narendra Modi ने X पर पोस्ट कर Made in India प्रोडक्ट्स के लिए 18% टैरिफ को सराहा। US Trade Representative Jamieson Greer ने कहा कि भारतीय इंडस्ट्रियल गुड्स टैरिफ जीरो तक आएंगे। इंडस्ट्री बॉडीज जैसे US-India Strategic Partnership Forum ने इसे शुरुआती कदम माना, जिसमें आगे की वार्ताएं शामिल हैं।
निर्यातकों ने राहत जताई, क्योंकि पाकिस्तान (19% टैरिफ) से आगे निकलना आसान होगा। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स ने अनिश्चितता जताई, क्योंकि डील के फाइनल डिटेल्स अभी वर्क आउट होने हैं। यह समझौता EU-India डील के बाद आया, जो भारतीय मार्केट को ग्लोबल ट्रेड में मजबूत पोजिशन देगा।
भविष्य की संभावनाएं समझौते से भारतीय GDP ग्रोथ में 0.5-1% की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज में। रुपये की स्थिरता से इंफ्लेशन कंट्रोल होगा, जबकि स्टॉक मार्केट में Nifty 50 को 25,000 के ऊपर जाने की उम्मीद है। हालांकि, ग्लोबल ऑयल प्राइस स्पाइक और RBI की रिजर्व बिल्डिंग से कुछ प्रेशर रह सकता है। यह डील ट्रंप-मोदी रिलेशनशिप को रीसेट करती है, जो पहले टैरिफ वॉर से प्रभावित था।
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