“US Fed ने जनवरी 2026 में ब्याज दरों को 3.5-3.75% पर स्थिर रखा, जिससे RBI पर दबाव बढ़ा है। गिरते रुपये (91.4/USD के आसपास) और बॉन्ड यील्ड (6.76%) में उछाल के बीच RBI 6 फरवरी की बैठक में रेपो रेट 5.25% पर होल्ड कर सकता है, साथ ही बॉन्ड खरीद और लिक्विडिटी इंजेक्शन जैसे कदम उठा सकता है।”
US Fed की हालिया बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रहा है। जनवरी 2026 में Fed ने फेडरल फंड्स रेट को 3.5-3.75% के रेंज में रखा, जो 2025 में तीन लगातार कट के बाद पहला होल्ड है। इससे वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत हुआ, जिसका सीधा प्रभाव भारतीय रुपये पर पड़ा। रुपये ने जनवरी के अंत में 92/USD का निचला स्तर छुआ, और फरवरी की शुरुआत में 91.4-91.7 के बीच ट्रेड कर रहा है। यह कमजोरी विदेशी निवेशकों के आउटफ्लो से बढ़ी, जहां 2025 से अब तक इक्विटी मार्केट से 22.9 बिलियन USD निकले।
RBI के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि 2025 में कुल 125 bps का रेट कट (फरवरी से दिसंबर तक) करने के बाद अब आगे कट की गुंजाइश सीमित दिख रही है। दिसंबर 2025 में रेपो रेट को 5.25% पर लाया गया, जो जुलाई 2022 के बाद सबसे निचला स्तर है। लेकिन रुपये की गिरावट और बॉन्ड मार्केट में यील्ड का उछाल RBI को सतर्क बना रहा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 6 फरवरी की MPC बैठक में रेट होल्ड रहेगा, क्योंकि मुद्रास्फीति 1.33% (दिसंबर 2025) पर कम है, लेकिन नई CPI सीरीज (फरवरी 12 से लागू) में फूड वेटेज कम होने से हेडलाइन इन्फ्लेशन 20-30 bps बढ़ सकता है।
बॉन्ड मार्केट में दबाव स्पष्ट है। 10-ईयर गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड फरवरी 2 को 6.76% पर पहुंचा, जो एक साल का हाई है। इसका मुख्य कारण बजट 2026 में रिकॉर्ड 17.2 ट्रिलियन रुपये का ग्रॉस बॉरोइंग प्लान है, जो मौजूदा साल के 14.61 ट्रिलियन से 18% ज्यादा। नेट मार्केट बॉरोइंग 11.7 ट्रिलियन रुपये रहेगा, लेकिन सप्लाई-डिमांड असंतुलन से यील्ड बढ़ा। Nomura और ICICI Securities के अनुसार, यील्ड 7% तक जा सकता है, अगर RBI सपोर्ट न बढ़ाए। दिसंबर में RBI ने 1 ट्रिलियन रुपये के OMO बॉन्ड खरीद और 5 बिलियन USD के फॉरेक्स स्वैप्स की घोषणा की थी, जो लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए थे।
मुख्य आर्थिक इंडिकेटर्स की तुलना (2025 vs 2026 अनुमान):
| इंडिकेटर | 2025 वैल्यू | 2026 अनुमान | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| RBI Repo Rate | 5.25% (दिसंबर अंत) | 5.25% (फरवरी होल्ड) | रेट कट की गुंजाइश कम, ग्रोथ सपोर्ट सीमित |
| INR/USD | 89-90 रेंज (मध्य 2025) | 91.4-92 (फरवरी) | 5.21% सालाना गिरावट, इंपोर्ट महंगा |
| 10-Year Bond Yield | 6.5% (अक्टूबर) | 6.76% (फरवरी) | बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ा, इन्वेस्टर्स सतर्क |
| CPI Inflation | 2.6% (अनुमान) | 2.0-2.2% (नई सीरीज) | टारगेट 2-6% में, लेकिन रिवीजन से रिस्क |
| GDP Growth | 6.8% (FY25) | 7.3% (FY26) | स्ट्रॉन्ग, लेकिन एक्सटर्नल रिस्क्स |
रुपये की गिरावट के पीछे ग्लोबल अनिश्चितता है, जैसा कि फाइनेंस मिनिस्टर Nirmala Sitharaman ने कहा। FDI इनफ्लो कम (केवल 10-15% ग्रोथ) और कैपिटल आउटफ्लो से करंट अकाउंट डेफिसिट फाइनेंसिंग मुश्किल। RBI ने इंटरवेंशन बढ़ाया, जहां स्टेट-रन बैंक डॉलर बेच रहे हैं। लेकिन अगर रुपये 92/USD पार करता है, तो RBI फॉरेक्स रिजर्व्स (करीब 700 बिलियन USD) से ज्यादा इंटरवेंशन कर सकता है। इससे इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, खासकर ऑयल (80% इंपोर्ट) और इलेक्ट्रॉनिक्स में, जो इन्फ्लेशन को पुश कर सकता है।
संभावित बड़े फैसले RBI की ओर से:
लिक्विडिटी मेजर्स: दिसंबर के बाद और 1.5 ट्रिलियन रुपये के बॉन्ड खरीद या नए स्वैप्स की घोषणा, ताकि बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़े और रेट ट्रांसमिशन स्पीड-अप हो। मौजूदा स्प्रेड्स में अंतर से फ्रेश लोन रेट्स पूरी तरह कम नहीं हुए।
रुपये पर फोकस: अगर कमजोरी जारी रही, तो RBI पॉलिसी में ‘न्यूट्रल स्टांस’ रखते हुए FX इंटरवेंशन बढ़ा सकता है। Nomura के अनुसार, रुपये को 90/USD तक वापस लाने के लिए मिड-2026 तक इंतजार, लेकिन शॉर्ट-टर्म में 91.8-92 रेंज।
बॉन्ड मार्केट सपोर्ट: सेकंडरी मार्केट में OMO बढ़ाकर यील्ड को 6.65-6.8% रेंज में कंट्रोल। बजट में कैपेक्स 12.1 ट्रिलियन रुपये होने से ग्रोथ बूस्ट, लेकिन बॉरोइंग से प्रेशर। RBI को ‘मार्जिनल बायर’ की भूमिका निभानी होगी।
इन्फ्लेशन मॉनिटरिंग: नई CPI बास्केट (2024 बेस) में फूड वेट 39% से कम होकर सेवाओं पर फोकस, जो हेडलाइन को 0.2-0.3% पुश कर सकता है। SBI के Soumya Kanti Ghosh के अनुसार, यह MPC को सतर्क रखेगा।
मार्केट्स पर प्रभाव गहरा होगा। अगर RBI होल्ड करता है, तो बॉन्ड यील्ड्स में और उछाल से स्टॉक मार्केट (Sensex, Nifty) में करेक्शन, खासकर बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर्स में। होम लोन EMI कम न होने से कंज्यूमर स्पेंडिंग प्रभावित। लेकिन स्ट्रॉन्ग GDP ग्रोथ (7.3%) और लो इन्फ्लेशन से लॉन्ग-टर्म रिकवरी। JPMorgan और Citi के अनुसार, रुपये की कमजोरी FDI को प्रभावित करेगी, लेकिन सर्विसेज एक्सपोर्ट्स (सॉफ्टवेयर, IT) से बैलेंस।
RBI की हालिया रेट हिस्ट्री (2025-2026):
| मीटिंग डेट | रेपो रेट चेंज | फाइनल रेट | कारण |
|---|---|---|---|
| फरवरी 2025 | -25 bps | 6.25% | ग्रोथ सपोर्ट, लो इन्फ्लेशन |
| जून 2025 | -25 bps | 6.00% | इकोनॉमिक रिकवरी |
| अगस्त 2025 | -25 bps | 5.75% | ग्लोबल स्लोडाउन |
| अक्टूबर 2025 | -25 bps | 5.50% | डॉमेस्टिक डिमांड |
| दिसंबर 2025 | -25 bps | 5.25% | इन्फ्लेशन 2% नीचे |
| फरवरी 2026 (अनुमान) | होल्ड | 5.25% | रुपये वीकनेस, बॉन्ड प्रेशर |
Fed की होल्ड पॉलिसी से RBI पर प्रेशर है, क्योंकि रेट डिफरेंशियल कम होने से कैपिटल इनफ्लो प्रभावित। Powell ने कहा कि US इकोनॉमी ‘फर्म फुटिंग’ पर है, लेकिन लेबर मार्केट में स्लोडाउन। भारत में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 75% के ऊपर है, जो ग्रोथ को सपोर्ट करता है, लेकिन एक्सटर्नल रिस्क्स (ट्रेड वॉर्स, जियोपॉलिटिक्स) से सतर्कता जरूरी।
अगर RBI बड़े फैसले लेता है, जैसे टोटल रिटर्न स्वैप्स या म्युनिसिपल बॉन्ड इंसेंटिव्स (बजट में 100 करोड़ इंसेंटिव बड़े इश्यूज के लिए), तो बॉन्ड मार्केट डेप्थ बढ़ेगी। लेकिन शॉर्ट-टर्म में, रुपये को स्टेबलाइज करने के लिए इंटरवेंशन जरूरी। MUFG के अनुसार, 2026 में रुपये का अंडरपरफॉर्मेंस जारी रहेगा, लेकिन RBI की ऐक्शन से 90/USD तक रिकवर। कुल मिलाकर, RBI की पॉलिसी बैलेंसिंग एक्ट होगी, जहां ग्रोथ, इन्फ्लेशन और करेंसी स्टेबिलिटी को मैनेज करना चुनौती।
संभावित रिस्क्स और स्ट्रैटजीज:
रिस्क 1: रुपये में और गिरावट – अगर 92/USD पार, तो इंपोर्टेड इन्फ्लेशन से CPI 2.5% ऊपर। स्ट्रैटजी: FX रिजर्व्स से इंटरवेंशन, 700 बिलियन USD से 10-15% यूज।
रिस्क 2: बॉन्ड यील्ड स्पाइक – 7% तक पहुंचने से गवर्नमेंट बॉरोइंग कॉस्ट 1-2% बढ़ा। स्ट्रैटजी: OMO में 2 ट्रिलियन रुपये अतिरिक्त खरीद, लिक्विडिटी इंजेक्शन।
रिस्क 3: ग्लोबल फैक्टर्स – Fed अगर मार्च में कट करता है (कम चांस), तो रुपये को राहत। लेकिन ट्रंप-एरा टैरिफ्स से ट्रेड प्रभावित।
पॉजिटिव्स: स्ट्रॉन्ग FDI (2025 में 15% ग्रोथ), सर्विसेज एक्सपोर्ट्स (IT से 200 बिलियन USD) और कैपेक्स से ग्रोथ। RBI की न्यूट्रल स्टांस से फ्यूचर कट की गुंजाइश।
यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था की रेजिलिएंस टेस्ट कर रही है, जहां RBI के फैसले मार्केट सेंटिमेंट तय करेंगे।
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