स्टार्टअप कंपनियां बजट 2026 में टैक्स छूट, आसान क्रेडिट और सरलीकृत अनुपालन की मांग कर रही हैं। उद्योग संगठनों ने ईएसओपी टैक्स डिफरमेंट का विस्तार और क्लाउड सेवाओं पर टैक्स स्पष्टता की अपील की है। एमएसएमई सेक्टर लिक्विडिटी रिलीफ और रेगुलेटरी बाधाओं को कम करने पर जोर दे रहा है, जबकि फाइनेंशियल सेक्टर में एफडीआई लिमिट बढ़ाने और टैक्स रेशनलाइजेशन की उम्मीद है। ये मांगें स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए हैं।
भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में सक्रिय कंपनियां और उद्योग संगठन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आगामी यूनियन बजट 2026 में टैक्स छूट की बड़ी मांग कर रहे हैं। स्टार्टअप फाउंडर्स का कहना है कि मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर में छूट की कमी से शुरुआती चरण की कंपनियों को सर्वाइवल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Nasscom जैसे संगठनों ने सुझाव दिया है कि Employee Stock Option Plan (ESOP) पर टैक्स डिफरमेंट को सभी स्टार्टअप्स तक विस्तारित किया जाए, जिससे फाउंडर्स को ग्रोथ पर फोकस करने में मदद मिलेगी।
स्टार्टअप्स की मांगों में क्रेडिट एक्सेस को आसान बनाना प्रमुख है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के अनुसार, कई स्टार्टअप्स को बैंकिंग सिस्टम से लोन मिलने में देरी हो रही है, जिससे कैश फ्लो प्रभावित होता है। वे चाहते हैं कि बजट में स्पेशल क्रेडिट स्कीम्स लाई जाएं, जैसे कि गारंटी-फ्री लोन या लो-इंटरेस्ट फंडिंग ऑप्शंस, खासकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और टेक-इनेबल्ड हेल्थ सेक्टर्स के लिए। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर ये मांगें मानी गईं, तो स्टार्टअप सेक्टर में 20-25% अधिक निवेश आ सकता है।
टैक्स रिलीफ की डिटेल्स में स्टार्टअप्स ने Angel Tax की पूरी तरह से छूट की अपील की है, जो पहले से ही कुछ हद तक रिलैक्स की गई है, लेकिन पूरी तरह से हटाने से विदेशी इन्वेस्टमेंट बढ़ेगा। इसके अलावा, क्लाउड सर्विसेज पर टैक्स ट्रीटमेंट में स्पष्टता की मांग है, क्योंकि इंडियन डेटा सेंटर्स पर विदेशी क्लाउड यूज से जुड़े टैक्स इश्यूज स्टार्टअप्स को परेशान कर रहे हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे टैक्स क्लैरिफिकेशन से स्टार्टअप्स के ऑपरेशनल कॉस्ट में 15% तक की बचत हो सकती है।
एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए कॉम्प्लायंस को सरल बनाने की डिमांड भी तेज है। मौजूदा स्कीम्स जैसे Startup India में फंडिंग एक्सेस और रेगुलेटरी अप्रूवल्स में गैप्स हैं, जिससे ग्रोथ रुक रही है। उद्योग बॉडीज ने लेबर लॉज और टैक्सेशन नियमों में रिडक्शन ऑफ अप्रूवल्स की मांग की है, जैसे कि लाइसेंस और परमिट्स को डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम से जोड़ना। इससे स्टार्टअप्स का समय और रिसोर्सेस बचेंगे, जो इनोवेशन पर लगाए जा सकेंगे।
बजट 2026 में स्टार्टअप्स के लिए सर्वाइवल इंसेंटिव्स की भी उम्मीद है। शुरुआती स्टेज की कंपनियों के लिए टारगेटेड सब्सिडीज और परफॉर्मेंस-लिंक्ड टैक्स बेनिफिट्स की मांग है, खासकर इंपैक्ट-ड्रिवन वेंचर्स जैसे कि हेल्थकेयर और एजुकेशन टेक में। इंडस्ट्री लीडर्स ने कहा है कि अगर टैक्स हॉलिडे को 2030 तक एक्सटेंड किया गया, तो स्टार्टअप्स की संख्या में 30% इजाफा हो सकता है, जो Viksit Bharat के विजन को सपोर्ट करेगा।
फाइनेंशियल सेक्टर से जुड़ी मांगों में पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए FDI लिमिट्स बढ़ाने और फॉरेन बैंकों के लिए टैक्स रेशनलाइजेशन शामिल है। स्टार्टअप्स का मानना है कि इससे कैपिटल एक्सेस बेहतर होगा, और लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को प्रोत्साहन मिलेगा। एक अनुमान के मुताबिक, टैक्स कंप्लायंस को मान्यता देकर ट्रस्ट बिल्ड करने से फॉर्मल फाइनेंशियल सिस्टम में 10-15% अधिक भागीदारी बढ़ सकती है।
स्टार्टअप्स की प्रमुख मांगों को समझने के लिए यहां एक टेबल दी गई है:
| क्षेत्र | प्रमुख मांग | संभावित प्रभाव |
|---|---|---|
| टैक्सेशन | ESOP टैक्स डिफरमेंट का विस्तार और Angel Tax की छूट | फाउंडर्स को रिटेंशन और ग्रोथ में मदद, निवेश में 20% वृद्धि |
| क्रेडिट एक्सेस | गारंटी-फ्री लोन और लो-इंटरेस्ट फंडिंग | कैश फ्लो सुधार, स्टार्टअप सर्वाइवल रेट में 25% इजाफा |
| कॉम्प्लायंस | अप्रूवल्स और लाइसेंस को सरल बनाना | ऑपरेशनल कॉस्ट में 15% कमी, इनोवेशन पर फोकस |
| इंसेंटिव्स | टारगेटेड सब्सिडीज और टैक्स हॉलिडे एक्सटेंशन | स्टार्टअप संख्या में 30% बढ़ोतरी, इंपैक्ट सेक्टर्स में ग्रोथ |
| क्लाउड और टेक | टैक्स ट्रीटमेंट में स्पष्टता | कॉस्ट सेविंग और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस |
ये मांगें स्टार्टअप इकोसिस्टम की चुनौतियों को एड्रेस करती हैं, जैसे कि रेगुलेटरी कॉम्प्लेक्सिटी और ग्लोबल कॉम्पिटिशन। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बजट में ये शामिल हुए, तो इंडिया का स्टार्टअप सेक्टर ग्लोबल लीडर बन सकता है, खासकर AI और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसे एरियाज में।
स्टार्टअप लीडर्स ने वित्त मंत्रालय से अपील की है कि बजट में प्राइवेट सेक्टर और स्टार्टअप्स को डिफेंस प्रोडक्शन में शामिल करने के लिए बोल्ड टैक्स इंसेंटिव्स दिए जाएं। इससे एक्सपोर्ट्स बढ़ेंगे और जॉब क्रिएशन होगा। एक स्टडी में पाया गया है कि ऐसे इंसेंटिव्स से डिफेंस सेक्टर में स्टार्टअप पार्टिसिपेशन 40% तक बढ़ सकता है।
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप्स ने स्ट्रॉन्गर KYC और रिस्पॉन्सिबल क्रेडिट रिपोर्टिंग की मांग की है, जो बजट में शामिल हो सकती है। इससे फाइनेंशियल इनक्लूजन बढ़ेगा, और रूरल एरियाज में स्टार्टअप ग्रोथ को बूस्ट मिलेगा। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इससे 1 करोड़ से अधिक छोटे बिजनेस को फायदा होगा।
स्टार्टअप्स की मांगों में GST रेशनलाइजेशन भी शामिल है, खासकर मैन-मेड फाइबर्स और पॉलिमर्स से जुड़े प्रोडक्ट्स पर। वे चाहते हैं कि ट्रैवल प्रोडक्ट्स पर GST को रेशनलाइज किया जाए, जिससे सेक्टर में ग्रोथ आएगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे रिफॉर्म्स से एमएसएमई सेक्टर में 10-12% अधिक उत्पादन हो सकता है।
जनरेशन Z की उम्मीदें भी स्टार्टअप डिमांड्स से जुड़ी हैं। वे चाहते हैं कि बजट में स्किल डेवलपमेंट पॉलिसीज को बूस्ट दिया जाए, जिससे यंग प्रोफेशनल्स और स्टार्टअप्स को फायदा हो। इससे इकोनॉमी में टैलेंट पूल बढ़ेगा, और स्टार्टअप्स को स्किल्ड वर्कफोर्स मिलेगी। अनुमान है कि ऐसे मेजर्स से 5-7% अधिक जॉब क्रिएट होंगे।
स्टार्टअप्स ने इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स में टैक्स बेनिफिट्स की मांग की है। PwC जैसे ऑर्गनाइजेशंस ने सुझाव दिया है कि AI इन एजुकेशन के लिए 500 करोड़ रुपये का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाए, जो स्टार्टअप्स को सपोर्ट करेगा। इससे टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट्स में इंडिया लीडर बनेगा।
कुल मिलाकर, स्टार्टअप्स की ये डिमांड्स इंडिया की इकोनॉमिक ग्रोथ को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए जरूरी हैं। अगर वित्त मंत्री इन पर ध्यान देंगी, तो स्टार्टअप इकोसिस्टम में नई ऊर्जा आएगी, और Viksit Bharat का लक्ष्य करीब आएगा।
प्रमुख पॉइंट्स:
टैक्स रिलीफ: स्टार्टअप्स चाहते हैं कि प्रॉफिट पर 100% डिडक्शन तीन साल तक मिले।
क्रेडिट सपोर्ट: स्पेशल फंड्स से लोन एक्सेस को आसान बनाना।
कॉम्प्लायंस रिफॉर्म्स: डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से अप्रूवल्स को स्पीड अप करना।
इंसेंटिव्स: परफॉर्मेंस-बेस्ड सब्सिडीज और एक्सपोर्ट प्रोमोशन।
सेक्टर-स्पेसिफिक: EV, हेल्थ और AI में टारगेटेड बेनिफिट्स।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट और टिप्स सूचना उद्देश्यों के लिए है। इसमें दिए गए विचार और डेटा विभिन्न रिपोर्ट्स से प्रेरित हैं, लेकिन निवेश या फैसले लेने से पहले पेशेवर सलाह लें।